बैंक में मिनिमम बैलेंस को लेकर आज नया नियम लागू अब इतना रखना होगा Bank Minimum Balance New Rule

Published On: February 9, 2026
Bank Minimum Balance New Rule

Bank Minimum Balance New Rule: भारत में बैंकिंग प्रणाली लगातार विकसित और आधुनिक हो रही है तथा ग्राहकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से नए नियम और सुधार लागू किए जा रहे हैं। वर्ष दो हजार पच्चीस में भारतीय रिज़र्व बैंक और विभिन्न वाणिज्यिक बैंकों ने मिलकर कई महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी बदलाव किए हैं जो देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों को सीधे प्रभावित करेंगे। इन नए नियमों और बदलावों का सीधा और व्यापक असर आपके बचत खाते, मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता, एटीएम से लेनदेन, डिजिटल भुगतान सेवाओं और जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज दरों पर पड़ने वाला है। यदि आप अपना बैंक खाता नियमित रूप से सक्रिय रखते हैं या रोजमर्रा के विभिन्न वित्तीय लेनदेन के लिए इसका उपयोग करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अत्यंत आवश्यक और उपयोगी है।

इन नए नियमों और प्रावधानों को लागू करने का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य बैंक ग्राहकों को अधिक सुरक्षा, बेहतर सेवाएं, कम शुल्क और अधिक पारदर्शिता प्रदान करना है। नए बैंकिंग प्रावधानों से जहां एक ओर छोटे खाताधारकों और आम नागरिकों को काफी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान प्रणाली और जीरो बैलेंस खातों को भी और अधिक मजबूत और उपयोगी बनाया गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और इनका आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

बचत खाते में नया मिनिमम बैलेंस नियम

भारतीय रिज़र्व बैंक ने वर्ष दो हजार पच्चीस से एक नई और महत्वपूर्ण गाइडलाइन लागू की है जिसके अंतर्गत सभी वाणिज्यिक बैंकों को अपने ग्राहकों के लिए मिनिमम बैलेंस यानी न्यूनतम शेष राशि निर्धारित करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। हालांकि इस स्वतंत्रता के साथ एक मूल और अनिवार्य सीमा भी तय की गई है जो पांच सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक है। इस महत्वपूर्ण बदलाव का स्पष्ट मतलब यह है कि अब बैंक खाताधारक बिना किसी डर या चिंता के बहुत कम न्यूनतम राशि बनाए रख सकते हैं। यह ग्राहकों के लिए एक बड़ी राहत है क्योंकि पहले कई बड़े सरकारी और निजी बैंक अपने ग्राहकों से तीन हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक का मिनिमम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्य शर्त लगाते थे। यह बदलाव विशेष रूप से आम लोगों, छोटे खाताधारकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बहुत बड़ी आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से किया गया है।

इसके अतिरिक्त एक और महत्वपूर्ण सुधार यह किया गया है कि यदि कोई ग्राहक लगातार तीन महीने तक अपने खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने में विफल रहता है, तो अब बैंक उस पर केवल पचास रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक का ही पेनल्टी चार्ज काट सकते हैं। पहले की व्यवस्था में यह पेनल्टी राशि छह सौ रुपये या उससे भी अधिक हो जाती थी जिससे कई खाताधारकों पर अनावश्यक और भारी आर्थिक बोझ पड़ता था। इस नए नियम के लागू होने से ग्राहक अपने पैसे पर अधिक नियंत्रण रख पाएंगे और अनावश्यक बैंकिंग शुल्क से बच सकेंगे।

जीरो बैलेंस खातों पर नया ब्याज नियम

वर्ष दो हजार पच्चीस में बैंकिंग क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और स्वागत योग्य बदलाव यह हुआ है कि अब जीरो बैलेंस खातों पर भी निश्चित और नियमित ब्याज दिया जाएगा। भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश के सभी वाणिज्यिक बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री जनधन खाते या बेसिक सेविंग अकाउंट पर कम से कम साढ़े तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पूरी तरह से अनिवार्य होगा। यह नियम देश के लाखों गरीब, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर ग्राहकों को बहुत बड़ा फायदा पहुंचाने वाला है। पहले इन खातों पर कोई ब्याज नहीं मिलता था जिससे लोगों को अपनी मेहनत की बचत पर कोई लाभ नहीं मिल पाता था। इस नए प्रावधान से लोगों को अपनी बचत बैंक में रखने की प्रेरणा मिलेगी और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों और महिला खाताधारकों को भी अतिरिक्त ब्याज लाभ देने का एक विशेष नियम लागू किया गया है। साठ वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग खाताधारकों को सामान्य ब्याज दर से शून्य दशमलव पचहत्तर प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज और महिला खाताधारकों को शून्य दशमलव पच्चीस प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज प्रदान किया जाएगा। यह कदम महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है तथा वरिष्ठ नागरिकों को उनकी बचत पर बेहतर रिटर्न प्रदान करता है।

एटीएम और डिजिटल भुगतान के नए नियम

नए नियमों के अनुसार अब एटीएम से नकद निकासी पर पहले की तुलना में ग्राहकों को काफी अधिक राहत दी गई है। मेट्रो शहरों में रहने वाले ग्राहक प्रत्येक महीने पांच निःशुल्क एटीएम ट्रांजैक्शन कर सकते हैं जबकि नॉन-मेट्रो शहरों में यह सीमा सात मुफ्त लेनदेन तक बढ़ा दी गई है। निःशुल्क सीमा समाप्त होने के बाद अब बैंक केवल अठारह रुपये नकद निकासी पर और आठ रुपये बैलेंस पूछताछ पर चार्ज ले सकेंगे। पहले यह शुल्क इक्कीस रुपये तक पहुंच जाता था।

डिजिटल भुगतान की बात करें तो आरबीआई ने बहुत स्पष्ट कर दिया है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। चाहे आप गूगल पे, फोनपे या पेटीएम से कितनी भी राशि का भुगतान करें, आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा।

बैंकिंग के नए नियम दो हजार पच्चीस ग्राहकों के हित में हैं और कम शुल्क, बेहतर ब्याज और अधिक सुविधाएं प्रदान करते हैं। इन बदलावों से लाभ उठाएं।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। यहां प्रस्तुत जानकारी प्रदान किए गए दस्तावेज़ पर आधारित है और बैंकिंग नियम, शुल्क और ब्याज दरें भारतीय रिज़र्व बैंक और विभिन्न बैंकों द्वारा समय-समय पर बदली जा सकती हैं। पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि वे किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देखें या शाखा से संपर्क करें और नवीनतम नियमों की पुष्टि अवश्य करें। वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित होगा।

Aarti Sharma

Aarti Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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