UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज, ICICI के ग्राहकों को झटका UPI Payment New Rules

Published On: February 9, 2026
UPI Payment New Rules

UPI Payment New Rules: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान की दुनिया में एक क्रांति लेकर आया है और पिछले कुछ वर्षों में इसने देश में कैशलेस लेनदेन को बेहद आसान, तेज और सुरक्षित बना दिया है। यूपीआई के माध्यम से लोग अपने मोबाइल फोन से कुछ ही सेकंड में किसी को भी पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, बिल का भुगतान कर सकते हैं, ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं और विभिन्न सेवाओं के लिए पेमेंट कर सकते हैं। अब तक यूपीआई लेनदेन लगभग पूरी तरह से निःशुल्क था जिसने इसे आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था। हालांकि, अब इस व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं जो उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

आईसीआईसीआई बैंक ने दस दिसंबर दो हजार पच्चीस से यूपीआई लेनदेन पर एक नया नियम लागू किया है। इस नए नियम के तहत अब पेमेंट एग्रीगेटर्स यानी भुगतान संग्राहकों से प्रत्येक यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एक निर्धारित शुल्क वसूला जाएगा। यह निर्णय भारतीय डिजिटल भुगतान परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव है और इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। यह लेख इस नए शुल्क संरचना, इसके कारणों, प्रभावों और भविष्य में होने वाले संभावित बदलावों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।

नए शुल्क की विस्तृत संरचना

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा लागू किए गए नए नियम के अनुसार अब बैंक प्रत्येक यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शून्य दशमलव शून्य दो प्रतिशत यानी दो बेसिस प्वाइंट का शुल्क लेगा। यह गणना लेनदेन की कुल राशि पर की जाएगी। हालांकि, इस शुल्क की एक अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है जो छह रुपये प्रति ट्रांजैक्शन है। इसका मतलब यह है कि चाहे आप तीस हजार रुपये का लेनदेन करें या तीन लाख रुपये का, अधिकतम शुल्क केवल छह रुपये ही होगा। यह व्यवस्था उन पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए है जिनका आईसीआईसीआई बैंक में एस्क्रो अकाउंट यानी विशेष सुरक्षित खाता है।

इसके अलावा, यदि किसी पेमेंट एग्रीगेटर का आईसीआईसीआई बैंक में एस्क्रो अकाउंट नहीं है, तो उनके लिए शुल्क दर अधिक होगी। ऐसे मामलों में बैंक शून्य दशमलव शून्य चार प्रतिशत यानी चार बेसिस प्वाइंट का शुल्क वसूलेगा। इस उच्च शुल्क दर की भी एक अधिकतम सीमा है जो दस रुपये प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है। यह अंतर इसलिए रखा गया है ताकि पेमेंट एग्रीगेटर्स को आईसीआईसीआई बैंक में एस्क्रो खाता खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके जिससे बैंक के लिए लेनदेन को ट्रैक करना और सुरक्षित रखना आसान हो जाता है। यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह शुल्क सीधे ग्राहकों या व्यापारियों से नहीं लिया जाएगा बल्कि पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों से वसूला जाएगा।

शुल्क लगाने के पीछे के मुख्य कारण

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा यह नया शुल्क लागू करने के पीछे कुछ ठोस और तर्कसंगत कारण हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि यूपीआई सिस्टम को मेंटेन करने, चलाने और सुरक्षित रखने में बैंक को काफी खर्च करना पड़ता है। इसमें सर्वर की लागत, तकनीकी स्टाफ का वेतन, सॉफ्टवेयर का रखरखाव, साइबर सुरक्षा, डेटा स्टोरेज और ग्राहक सेवा शामिल है। दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह है कि बैंक को प्रत्येक यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई को भी एक निर्धारित शुल्क देना होता है। एनपीसीआई वह संगठन है जो पूरे यूपीआई नेटवर्क को संचालित और नियंत्रित करता है।

अब तक आईसीआईसीआई बैंक इस एनपीसीआई शुल्क को अपनी ओर से वहन कर रहा था और ग्राहकों या व्यापारियों से कोई पैसा नहीं ले रहा था। हालांकि, यूपीआई लेनदेन की संख्या में विस्फोटक वृद्धि के कारण यह खर्च बहुत बढ़ गया है। प्रतिदिन करोड़ों यूपीआई ट्रांजैक्शन होते हैं और इस विशाल नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने की लागत लगातार बढ़ रही है। इस नए बदलाव से डिजिटल पेमेंट सिस्टम की लागत का बोझ पेमेंट एग्रीगेटर्स पर भी आएगा ताकि बैंकों और एनपीसीआई पर सिस्टम के बढ़ते दबाव को संभाला जा सके और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके।

पेमेंट एग्रीगेटर्स कौन हैं

पेमेंट एग्रीगेटर्स यानी भुगतान संग्राहक वे मध्यस्थ कंपनियां या सेवा प्रदाता होते हैं जो ऑनलाइन व्यापारियों और ग्राहकों के बीच भुगतान प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाते हैं। ये कंपनियां व्यापारियों को विभिन्न भुगतान विधियों जैसे यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग और वॉलेट के माध्यम से ग्राहकों से पैसे प्राप्त करने में मदद करती हैं। भारत में कुछ प्रमुख पेमेंट एग्रीगेटर्स हैं पेटीएम, फोनपे, रेजरपे, कैशफ्री, पाइनलैब्स और बिलडेस्क। ये कंपनियां छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये उन्हें डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा प्रदान करती हैं।

आईसीआईसीआई बैंक का यह नया शुल्क केवल उन यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर लागू होगा जो बैंक के मर्चेंट अकाउंट में सीधे सेटल नहीं होते हैं। यदि किसी व्यापारी का खाता सीधे आईसीआईसीआई बैंक में है और भुगतान सीधे उस खाते में जाता है तो इस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

ग्राहकों और व्यापारियों पर संभावित प्रभाव

आईसीआईसीआई बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। हालांकि, पेमेंट एग्रीगेटर्स पर आने वाली यह अतिरिक्त लागत आने वाले समय में व्यापारियों या अंतिम उपयोगकर्ताओं पर परोक्ष रूप से प्रभाव डाल सकती है। यूपीआई अब तक लगभग पूरी तरह से निःशुल्क था लेकिन अब धीरे-धीरे इस व्यवस्था में बदलाव आ रहा है।

आईसीआईसीआई बैंक का यह निर्णय यूपीआई भुगतान की दुनिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह शुल्क पेमेंट एग्रीगेटर्स से लिया जाएगा और इससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत को साझा करने में मदद मिलेगी।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। यहां प्रस्तुत जानकारी प्रदान किए गए दस्तावेज़ पर आधारित है और यूपीआई शुल्क, नियम और कार्यान्वयन में बैंकों द्वारा समय-समय पर परिवर्तन किया जा सकता है। पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि वे किसी भी लेनदेन से पहले आईसीआईसीआई बैंक की आधिकारिक वेबसाइट icicibank.com देखें या अपनी बैंक शाखा से संपर्क करें और नवीनतम शुल्क संरचना की पुष्टि अवश्य करें। पेमेंट एग्रीगेटर्स से भी जानकारी लें।

Aarti Sharma

Aarti Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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