अब अपने पैतृक धन संपत्ति में अपना हिस्सा कैसे करें अपने नाम जाने अब पूरी जानकारी ! Ancestral Property Distribution

Published On: February 9, 2026
Ancestral Property Distribution

Ancestral Property Distribution: भारत में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद एक गंभीर और व्यापक समस्या बन चुके हैं जो देश के लगभग सभी राज्यों और क्षेत्रों में देखने को मिलते हैं। परिवारों के बीच पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर होने वाले झगड़े न केवल रिश्तों में कड़वाहट पैदा करते हैं बल्कि कई बार पीढ़ियों तक चलने वाले कानूनी मुकदमों में भी बदल जाते हैं। इन विवादों को देखते हुए भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने अत्यंत महत्वपूर्ण और साहसिक कदम उठाते हुए इन सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। उदाहरण के लिए बिहार राज्य में मुख्य सचिव विजय सिंह ने हाल ही में नए निर्देश जारी करते हुए एक महत्वपूर्ण नोटिस के माध्यम से सभी संबंधित सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है।

इस आदेश में कहा गया है कि पैतृक संपत्ति से संबंधित जो भी विवाद अभी लंबित पड़े हुए हैं या अदालतों में चल रहे हैं, उन सभी मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए ताकि प्रत्येक हकदार व्यक्ति को एक निश्चित और उचित समय सीमा के भीतर अपनी पैतृक संपत्ति में अपना न्यायसंगत हिस्सा मिल सके। कई ऐसे राज्य हैं जहां जमीन से जुड़ी खबरें और विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग इन जटिल कानूनी झगड़ों में फंसे हुए हैं। इन सभी समस्याओं को जड़ से दूर करने के लिए सभी राज्य सरकारें आपसी बैठकें करके नए और प्रभावी निर्देश जारी कर रही हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि पैतृक संपत्ति का बंटवारा कैसे करें और अपने हिस्से को अपने नाम कैसे दर्ज कराएं।

पैतृक संपत्ति का बंटवारा कैसे करें

यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद लगभग हर जगह मौजूद हैं और अधिकांश परिवारों में यह सबसे बड़ी और जटिल समस्या की पहचान बन गई है। इन सभी विवादों को सुलझाने और व्यवस्थित तरीके से दूर करने के लिए भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने मिलकर नए और कड़े कदम उठाते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि संपत्ति से संबंधित सभी लंबित कार्यों और आवेदनों को नब्बे दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा और समाप्त किया जाए। इसका मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई भी दस्तावेज जमा किया है या संपत्ति बंटवारे के लिए आवेदन दिया है तो उन सभी दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज गति से पूरी की जाएगी।

पैतृक संपत्ति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका स्वामित्व केवल एक व्यक्ति का नहीं होता है बल्कि पूरे खानदान या वंश के सभी सदस्यों का संयुक्त अधिकार होता है। इसमें परदादा से लेकर पिता, पुत्र और पोते तक सभी का समान हिस्सा और भागीदारी का अधिकार माना जाता है। यह स्पष्ट समझना आवश्यक है कि भले ही दादा या पिता ने उस भूमि या संपत्ति को अपने व्यक्तिगत पैसे से खरीदा हो या स्वयं अर्जित किया हो, फिर भी यदि वह संपत्ति चार पीढ़ियों से चली आ रही है तो सभी कानूनी वारिसों को उसमें समान हिस्सा और भागीदारी का अधिकार होगा। हालांकि यह नियम केवल पैतृक संपत्ति पर लागू होता है न कि स्व-अर्जित संपत्ति पर।

कानूनी अधिकार और हिस्सेदारी का निर्धारण

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम उन्नीस सौ छप्पन जो भारत में हिंदू परिवारों के संपत्ति अधिकारों को नियंत्रित करता है, के महत्वपूर्ण प्रावधानों के अनुसार पैतृक संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को पूरी तरह से समान और बराबर का कानूनी अधिकार प्राप्त है। यह एक क्रांतिकारी बदलाव है क्योंकि पहले के समय में यह अधिकार केवल पुरुष उत्तराधिकारियों को ही दिया जाता था और बेटियों को उनके पिता की संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मिलता था। लेकिन वर्ष दो हजार पांच में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में किए गए ऐतिहासिक संशोधन के बाद बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर हिस्सेदारी का पूर्ण कानूनी अधिकार मिल गया है।

अब कानून की नजर में बेटी और बेटा दोनों समान हैं और दोनों को पैतृक संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलने का अधिकार है। यदि कोई विवाहित बेटी अपने पिता की पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा लेना चाहती है तो वह पूरी तरह से कानूनी रूप से ऐसा कर सकती है। नए नियम और कानून के अनुसार बेटियों को समान हिस्सा मिलने की अनुमति सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा भी पुष्टि की जा चुकी है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया है।

अपने हिस्से की पुष्टि और नाम दर्ज करने की प्रक्रिया

यदि आप अपनी पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से की पुष्टि करना चाहते हैं और अपना नाम आधिकारिक रूप से दर्ज कराना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपने गांव की ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र में नगर निगम के भूमि अभिलेख कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाना होगा। वहां आपको उस विशिष्ट संपत्ति का खसरा नंबर या खतौनी और रजिस्ट्री के सभी आधिकारिक रिकॉर्ड मांगने होंगे। अच्छी खबर यह है कि अब सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और ऑनलाइन बना दिया है जिससे आम नागरिकों को यह सुविधा बहुत जल्द और आसानी से उपलब्ध हो जाएगी।

आप राज्य सरकार के भूमि अभिलेख पोर्टल पर जाकर भी अपनी संपत्ति की पूरी जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं। अपनी संपत्ति में अपना नाम आधिकारिक रूप से दर्ज करवाने के लिए व्यक्ति को अपने जिले के तहसील कार्यालय या उप निबंधन कार्यालय में एक औपचारिक आवेदन पत्र जमा करना होता है। इस आवेदन के साथ आपको कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, संपत्ति के मूल कागजात, वारिस प्रमाण पत्र और यदि संभव हो तो परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति का प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा।

सरकार द्वारा उपलब्ध सहायता योजनाएं

भारत सरकार ने भूमि और संपत्ति के रिकॉर्ड को पारदर्शी, सटीक और आसानी से सुलभ बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी डिजिटल योजनाएं शुरू की हैं। इनमें डिजिटल भूमि अभिलेख योजना और डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम विशेष रूप से प्रचलित और सफल हुई हैं।

पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा दर्ज कराना अब पहले से आसान हो गया है। डिजिटल प्रक्रिया और सरकारी निर्देशों से विवाद तेजी से सुलझ रहे हैं। अपने अधिकारों को समझें और समय पर कार्रवाई करें।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। यहां प्रस्तुत जानकारी प्रदान किए गए दस्तावेज़ पर आधारित है और संपत्ति के अधिकार, विभाजन की प्रक्रिया और कानूनी नियम राज्यों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले एक अनुभवी संपत्ति वकील से परामर्श अवश्य लें और अपने जिले के तहसील कार्यालय या भूमि अभिलेख विभाग से संपर्क करें। हर मामला अलग होता है इसलिए विशेषज्ञ सलाह आवश्यक है।

Aarti Sharma

Aarti Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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