
8th Pay Commission Date 2026: केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग से जुड़ी खबरें इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दिसंबर माह के प्रारंभ में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सांसद आनंद भदौरिया ने वित्त मंत्रालय से इस विषय पर पांच अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे थे। इन प्रश्नों के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जो जानकारी साझा की, उससे लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की चिंता दूर हो गई है। सरकार ने स्पष्ट रूप से बताया है कि आठवां वेतन आयोग सात नवंबर दो हजार पच्चीस को गजट अधिसूचना के माध्यम से औपचारिक रूप से गठित हो चुका है और यह आयोग वेतन, विभिन्न भत्तों और पेंशन से संबंधित महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।
संसद में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न
लोकसभा में सांसद आनंद भदौरिया ने एक असितारांकित प्रश्न के रूप में वित्त मंत्रालय से आठवें वेतन आयोग से जुड़े पांच बेहद अहम सवाल पूछे थे। पहला प्रश्न आयोग के गठन की स्थिति के बारे में था, जबकि दूसरा सवाल महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय करने की संभावना से जुड़ा था। तीसरे प्रश्न में पेंशनभोगियों की चिंताओं को दूर करने के विषय में पूछा गया था। चौथा सवाल कर्मचारियों को तत्काल राहत देने से संबंधित था और पांचवां प्रश्न आयोग की प्रगति की वर्तमान स्थिति के बारे में था। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दिसंबर के प्रथम सप्ताह में इन सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान किए, जिससे कर्मचारियों में व्याप्त भ्रम की स्थिति समाप्त हो गई।
आयोग के गठन और संरचना की जानकारी
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि आठवां वेतन आयोग सात नवंबर दो हजार पच्चीस को आधिकारिक रूप से गठित किया जा चुका है। यह एक स्वतंत्र आयोग है जिसका मुख्य कार्य सरकारी कर्मचारियों की वेतन संरचना की व्यापक समीक्षा करना है। आयोग वेतन मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर और विभिन्न भत्तों पर अपनी सिफारिशें देगा। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई को इस आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग में एक अंशकालिक सदस्य और एक सचिव भी शामिल हैं। आयोग का मुख्यालय दिल्ली में स्थापित किया गया है और यहीं से सभी कार्यों का संचालन होगा। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अठारह महीने का समय दिया गया है।
लाभार्थियों की संख्या और दायरा
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों से देश भर के लगभग पचास लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और करीब पैंसठ लाख पेंशनभोगी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। इस आयोग के दायरे में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी, रक्षा बलों के कर्मी और केंद्र शासित प्रदेशों में सेवारत कर्मचारी शामिल हैं। साथ ही न्यायपालिका और संसद के अधीन आने वाले विभिन्न संस्थानों के कर्मचारी भी इस आयोग के दायरे में आएंगे। आयोग वर्तमान आर्थिक स्थिति और वित्तीय विवेक को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। यह व्यापक दायरा यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी सेवा से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति इसका लाभ प्राप्त कर सके।
महंगाई भत्ते के विलय पर सरकार का स्पष्ट रुख
कर्मचारियों के बीच एक बड़ी चर्चा का विषय महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय करने की संभावना को लेकर था। वर्तमान में महंगाई भत्ता पचास प्रतिशत से अधिक हो चुका है और कर्मचारी चाहते थे कि इसे मूल वेतन में जोड़ दिया जाए, जिससे उनके वेतन में स्थायी वृद्धि हो और भविष्य के लाभों में भी बढ़ोतरी हो। हालांकि वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने बताया है कि महंगाई भत्ता हर छह महीने में नियमित रूप से बढ़ता रहेगा, जिससे कर्मचारियों को महंगाई से निरंतर राहत मिलती रहेगी। यह निर्णय मुख्य रूप से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इस दृष्टिकोण से लिया गया है।
पेंशनभोगियों के लिए राहत की खबर
पेंशनभोगियों के बीच एक बड़ी चिंता यह थी कि कहीं पेंशन को आयोग के दायरे से बाहर तो नहीं रखा जा रहा है। संदर्भ की शर्तों में पेंशन का स्पष्ट उल्लेख न होने से उनकी चिंता और बढ़ गई थी। राज्यसभा में भी इस विषय पर कई प्रश्न उठाए गए थे। दिसंबर के आरंभ में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पूर्णतया स्पष्ट कर दिया कि आयोग वेतन, भत्तों के साथ-साथ पेंशन पर भी व्यापक सिफारिशें करेगा और पेंशन का पुनरीक्षण अवश्य होगा। इस स्पष्टीकरण से लगभग पैंसठ लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली है। अनुमान है कि न्यूनतम पेंशन जो वर्तमान में नौ हजार रुपये के आसपास है, उसमें फिटमेंट फैक्टर के आधार पर अच्छी खासी वृद्धि हो सकती है।
फिटमेंट फैक्टर और वेतन वृद्धि की संभावनाएं
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिससे पुराने वेतन को गुणा करके नया वेतन निर्धारित किया जाता है। सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर दो दशमलव सत्तावन था। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों के बीच आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कुछ अनुमानों के अनुसार यह दो दशमलव छियासी या इससे भी अधिक हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो न्यूनतम मूल वेतन जो वर्तमान में अठारह हजार रुपये है, वह सैंतीस हजार चार सौ चालीस रुपये या इससे भी अधिक हो सकता है। निचले स्तर के कर्मचारियों जैसे चपरासी की कुल वेतन इक्यावन हजार रुपये तक और पुलिस कांस्टेबल की वेतन बासठ हजार रुपये तक जा सकती है। समग्र रूप से कर्मचारियों के वेतन में तीस से चौंतीस प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है।
रिपोर्ट प्रस्तुति और लागू होने की समयसीमा
आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट गठन की तारीख से अठारह महीनों के भीतर सरकार को सौंपनी होगी। इस हिसाब से रिपोर्ट वर्ष दो हजार सत्ताईस के मध्य तक आने की संभावना है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सरकार सभी सिफारिशों की गहन समीक्षा करेगी और आर्थिक स्थिति तथा बजटीय प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इन्हें लागू करने का निर्णय लेगी। लागू होने की संभावित तारीख जनवरी दो हजार छब्बीस या उसके बाद हो सकती है, हालांकि कुछ देरी की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सातवें वेतन आयोग की तरह इस बार भी आयोग कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है, जिससे कुछ सिफारिशों को जल्दी लागू किया जा सके।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से सरकारी खजाने पर लगभग नौ लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है। यह एक बहुत बड़ी राशि है और सरकार को इसे संभालने के लिए वित्तीय योजना बनानी होगी। आयोग वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों, देश की जीडीपी और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए संतुलित सिफारिशें देने का प्रयास करेगा। कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, सेवा नियमों में सुधार और सेवानिवृत्ति लाभों को बेहतर बनाने पर भी आयोग विचार करेगा। महिला कर्मचारियों और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
कर्मचारियों के लिए सुझाव और मार्गदर्शन
वर्तमान परिस्थिति में कर्मचारियों को धैर्य रखने की आवश्यकता है। जब तक आयोग की अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में होने वाली नियमित वृद्धि पर ध्यान देना चाहिए। अगली महंगाई भत्ता वृद्धि मार्च दो हजार छब्बीस में होने की संभावना है। कर्मचारियों को वेतन मैट्रिक्स को समझना चाहिए और अपनी यूनियनों से जुड़े रहना चाहिए। विभिन्न कर्मचारी संगठन आयोग के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं और कर्मचारियों को भी अपनी मांगों को संगठित तरीके से रखना चाहिए। ऑनलाइन उपलब्ध वेतन कैलकुलेटर के माध्यम से अनुमानित वेतन वृद्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुल मिलाकर संसद में मिले स्पष्ट उत्तरों से कर्मचारियों की चिंता काफी हद तक कम हुई है।
Disclaimer
यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और संसदीय कार्यवाही में प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। प्रस्तुत जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे किसी आधिकारिक घोषणा या सरकारी दस्तावेज के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। आठवें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें, फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि की सटीक दर और लागू होने की निश्चित तारीख केवल आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। पाठकों से अनुरोध है कि वे किसी भी निर्णय से पूर्व आधिकारिक सरकारी स्रोतों से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें और अफवाहों पर विश्वास न करें।









