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FASTag लागू होने से पहले सरकार का यू-टर्न, टोल प्लाजा पर मंत्रालय ने दी ये अस्थाई सुविधा

रविवार 15 दिसंबर से NHAI के सभी टोल प्लाजा पर फास्टैग (Fastag) के जरिये भुगतान की सुविधा शुरू होने जा रही है। लेकिन लागू होने से ठीक एक दिन पहले सरकार ने बड़ा यू-टर्न लिया है। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि देश के कम से कम 75 फीसदी टोल लेन पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से टोल कलेक्शन लिया जाए।

फास्टैग लेन बनाने को कहा था 

हालांकि मंत्रालय ने यह सुविधा अस्थाई तौर पर दी है। इसे पहले मंत्रालय ने डेडलाइन रखी थी कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने देश के सभी टोल प्लाजा पर 100 फीसदी भुगतान अनिवार्य तौर पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के जरिये लिया जाए। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस साल जुलाई में मंत्रालय ने एक पत्र भेजा था, जिसमें टोल प्लाजा की सभी टोल लेन को एक दिसंबर तक फास्टैग लेन में बदलने के लिए कहा था। मंत्रालय ने यह फैसला टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे-लंबे जाम से छुटकारा पाने के लिए किया था।

बनानी थी हाईब्रिड लेन

इससे पहले मंत्रालय ने फास्टैग के लागू होने की तारीख एक दिसंबर तय की थी, लेकिन 29 दिसंबर को अंतिम तिथि को 15 दिन और बढ़ाने का फैसला लिया गया। वहीं पहले यह फैसला लिया गया था कि सभी टोल प्लाजा पर एक हाईब्रिड लेन बनाई जाएगी, जिस पर बड़े वाहनों के अलावा फास्टैग और दूसरे तरीकों से भुगतान स्वीकार किया जाएगा।

30 दिन तक छूट

मंत्रालय का कहना है कि यह अस्थाई तौर पर किया गया है और केवल 30 दिन के लिए ही लागू होगा, ताकि टोल प्लाजा पर किसी तरह की अफरतफरी न मचे और ग्राहकों को परेशानी न उठानी पड़े। सरकार का कहना है कि 15 दिसंबर से फास्टैग व्यवस्था लागू होने से पहले अभी तक 80 लाख टैग्स बांटे जा चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस साल की शुरुआत में नेशनल हाइवेज पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन 25 फीसदी थी, जो अब 40 फीसदी तक पहुंच चुका है। वहीं NHAI के टोल प्लाजा पर रोजाना फास्टैग्स के जरिये 20-25 करोड़ की वेल्यू की 11 लाख ट्रांजेशन होती हैं।     

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