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सुंदरता के लिए नाखून बढ़ाने वाले लोग संभल जाएं, शरीर बन सकता है बीमारियों का घर

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जो लोग नाखून के बारे में ज्यादा समझ नहीं रखते, वे साफ-सुथरे और अच्छी तरह से तराशकर रखे गए नाखूनों को अक्सर सौंदर्यशास्त्र से जोड़कर देखते हैं, लेकिन नाखूनों की एक अलग दुनिया है, जहां सौंदर्य से ज्यादा सेहत का मामला है…

नाखून केराटिन नामक एक कठोर प्रोटीन से बने होते हैं। ये पैर और हाथ की उंगलियों के संवेदनशील पोर की सुरक्षा करते हैं। नाखून वस्तुओं को उठाने में भी सहायता करते हैं। लेकिन कभी आपने सोचा है कि स्वास्थ्य संबंधी सलाह देने वाले लोग आपको समय-समय पर नाखून को काटते रहने के लिए क्यों कहते हैं? 

लंबे और गंदे नाखून संभावित रूप से संक्रमण जैसे कि पिनवर्म्स पैदा कर सकते हैं। लंबे और गंदे नाखून में अधिक गंदगी और घातक बैक्टीरिया होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर संक्रमण हो सकता है। अध्ययनों में इस बात के संकेत मिले हैं कि नाखून में पाए जाने वाले बैक्टीरिया दस्त और उल्टी का कारण बनते हैं, जो कि बच्चों में बहुत आम है। 

नाखून गंदे हैं, तो रोगाणु आसानी से उनके शरीर में जा सकते हैं और परिणामस्वरूप संक्रमण हो सकता है, इसलिए बच्चों के नाखूनों को समय-समय पर काटते रहना चाहिए। बच्चे कई बार खुजली से राहत देने के लिए खुद को खरोंचकर चोट पहुंचा लेते हैं। बच्चे अक्सर अपनी नाक को खरोंचते हैं और यदि उनके नाखून बड़े हैं, तो उनके नथुने में चोट लग सकती है और खून भी आ सकता है।

बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक और संवेदनशील होती है और यदि उनकी मां के नाखून लंबे हैं, तो उससे बच्चे को चोट लग सकती है। बच्चों के साथ-साथ उनकी देखभाल करने वाली माताओं को भी विशेष रूप से अपने नाखूनों की स्वच्छता का पर्याप्त ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वे आमतौर पर खाद्य पदार्थों को संभालती हैं या शिशुओं के गंदे नैपी को धोती या बदलती हैं, तो आसानी से नाखून के नीचे सभी तरह के कीटाणुओं को आश्रय मिल सकता है।

आपके और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए नाखून को साफ और ठीक से काटकर रखना महत्वपूर्ण है। नाखूनों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए साबुन से केवल हाथ धोना सही तरीका नहीं है। किसी भी फंगल संक्रमण से बचने के लिए हाथों को नाखूनों सहित साफ करना आवश्यक है। कुल मिलाकर नाखूनों को बड़ा रखना बहुत सही नहीं। इंसान इसी वजह से इंसान है कि उसके नाखून बड़े नहीं होते। इसी नाखून को लेकर तो कभी महान साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा था,”नाखून बढ़ते हैं तो बढ़ें, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा।”

गर्भावस्था के दौरान, हार्मोन और मल्टीविटामिन के सेवन के साथ, नाखून सामान्य से अधिक तेज गति से बढ़ते हैं, लेकिन इसका विपरीत पक्ष यह है कि वे पतले और भंगुर हो सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप नाखून किसी चीज में फंस सकते हैं। यदि ये गंदे हों, तो संक्रमण हो सकता है, जो मां और भ्रूण के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान त्वचा पर खिंचाव के कारण पेट पर बहुत खुजली होती है और लंबे नाखून वास्तव में उस स्थिति में चोट पहुंचा सकते हैं। नेलपेंट और नेल रिमूवर में एसीटोन नामक रसायन मौजूद होता है, जो मां के तंत्रिका तंत्र पर कुछ विषाक्त प्रभाव भी डाल सकता है। 



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